समास किसे कहते है ? समास कितने प्रकार की होती है।
नमस्कार दोस्तों आज हम जानेंगे की समास किसे कहते है समास के कितने भेद होते है तथा समास का विग्रह कैसे किया जाता है।
समास की परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने नए सार्थक शब्दों को समास कहते है।
समास में प्राय: दो पद होते है - पूर्व पद ( पहला शब्द ) तथा उत्तर पद ( दूसरा शब्द )। इनमे कभी पूर्व पद की प्रधानता होती है तो कभी उत्तर पद की प्रधानता होती है। तो किसी समास में किसी भी पद की प्रधानता न होकर किसी तीसरे पद की प्रधानता होती है। इस आधार पर समास के दो भेद है।
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| समास |
समास के भेद
1. तत्पुरुष समास।
2. द्वंद्व।
3.द्विगु।
4. कर्मधारय।
5. बहुव्रीहि।
6.अव्ययीभाव।
तत्पुरुष समास
जिस समास का उत्तर पद ( दूसरा शब्द ) प्रधान और उन दोनों के बीच में कोई कारक चिन्ह लुप्त होता है तो वह तत्पुरुष समास कहलाता है। पहले शब्द के कारक चिन्ह को लोप करके दोनों शब्दों को मिला दिया जाता है
जैसे - " राजमहल "
इसमें महल शब्द प्रधान है , इसका विस्तृत रूप राजा का महल है। यहां पहले शब्द के साथ लगे कारक चिन्ह को हटाकर दोनों शब्दों को मिला दिया गया है। अत: यहां तत्पुरुष समास है।
कारकों के आधार पर तत्पुरुष समास के छः भेद है।
इसे पढ़ें -रामधारी सिंह ' दिनकर ' का जीवन
कर्म तत्पुरुष
इसमें कर्मकारक के चिन्ह " को " का लोप किया जाता है।
जैसे -
स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त।
देशगत = देश को गया हुआ।
यशप्राप्त = यश को प्राप्त।
करण तत्पुरुष
इसमें करण कारक " से " के द्वारा " का लोप रहता है।
जैसे -
मदांध = मद से अंधा।
शीर्षासन = शीर्ष के द्वारा आसन।
हस्तलिखित = हाथ के द्वारा लिखित।
रोगग्रस्त = रोग से ग्रस्त।
सम्प्रदान तत्पुरुष
इसमें सम्प्रदान कारक के चिन्ह " के लिए " का लोप रहता है।
जैसे -
प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला।
नाट्यशाला = नाटक के लिए शाला।
परीक्षाभवन = परीक्षा के लिए भवन।
अपादान तत्पुरुष
इसमें अपादान कारक के चिन्ह " से अलग होने का " का लोप रहता है।
जैसे -
जीवनमुक्त = जीवन से मुक्त।
कर्जमुक्त = कर्ज से मुक्त।
धनहीन = धन से हीन।
पदमुक्त = पद से मुक्त।
सम्बन्ध तत्पुरुष
इसमें सम्बन्ध कारक के चिन्ह "का " की " के " का लोप रहता है।
जैसे -
राजपुत्र = राजा का पुत्र।
विचाराधीन = विचार के अधीन।
राजरानी = राजा की रानी।
गृहस्वामी = गृह का स्वामी।
अधिकरण तत्पुरुष
इसमें अधिकरण कारक के चिन्ह " में " पर " का लोप रहता है।
जैसे -
नगरवास = नगर में वास।
आपबीती = अपने पर बीती हुई।
द्वंद्व समास
जिस समास के दोनों पद प्रधान हों और दोनों के बीच योजक चिन्ह ' और ' या ' आये तो द्वंद्व समास होता है .
जैसे -
दिन-रात = दिन और रात।
माता-पिता = माता और पिता।
जीवन-मरण = जीवन और मरण।
आगे-पीछे = आगे और पीछे।
सुख-दुःख = सुख और दुःख।
देश-विदेश = देश और विदेश।
नर-नारी = नर और नारी।
आज-कल = आज और कल।
धर्म-अधर्म = धर्म और अधर्म।
इसे पढ़ें -अलंकार किसे कहते है
द्विगु समास
जिस समास में पहला पद संख्या वाचक विशेषण हो और उत्तर पद प्रधान हो तो वह द्विगु समास कहलाता है।
जैसे -
त्रिभुवन।
चौराहा।
शताब्दी।
सप्ताह।
दोपहर।
त्रिलोक।
तिराहा।
त्रिफला।
चौपाल।
पंचामृत।
कर्मधारय समास
जिस समास का उत्तर पद प्रधान हो और पूर्व और उत्तर पद में विशेषण और विशेष्य अथवा उपमेय और उपमान का सम्बन्ध स्थापित हो तो वह कर्मधारय समास होता है।
जैसे -
नीलोत्पलम
मृगनयन
महाजन
सुपुरुष
गुरुदेव
महात्मा
बहुव्रीहि समास
जिस समास का न पहला पद प्रधान हो और न ही दूसरा पद प्रधान हो बल्कि इनको मिलाकर तीसरे पद का निर्माण हो , वह बहुव्रीहि समास कहलाता है।
जैसे -
दशानन
पीताम्बर
नीलाम्बर
लम्बोदर
पंचानन
गजानन
निशाचर
गिरिधर
पंचवटी
इसे पढ़ें -महाकवि सूरदास
अव्ययीभाव समास
जिस समास का पहला पद प्रधान व् अव्यय हो तो वह अव्ययीभाव समास होता है।
पहचान (पहला पद ) - आ , अनु , प्रति , हर , भर , यथा ,उप , आदि उपसर्ग।
जैसे -
आजीवन
अनुसार
आजन्म
प्रतिदिन
दिनोदिन
रातोंरात
यथासंभव
उपकार
तो दोस्तों उम्मीद है आपको समास के बारे में जानकारी बहुत पसंद आयी होगी।
धन्यवाद।



1 टिप्पणियाँ
Sir aapne
जवाब देंहटाएंsamas kise kahate hain ko acche se samjhaya hai thank you