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कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान : Who was Subhadra Kumari Chauhan ?

 सुभद्रा कुमारी कौन थी 

नमस्कार दोस्तों आज हम ऐसी कवयित्री के बारे में जानेंगे जिन्होंने राष्ट्रीय चेतना को जनमानस में प्रचारित किया तथा राष्ट्र को देशभक्ति की भावना के सूत्र में पिरोया।  आज हम राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका सुभद्रा कुमारी चौहान जी के बारे में जानेंगे। 

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कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय 

राष्ट्र कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म  सन 1904 ई. में प्रयाग के निहालपुर मोहल्ले में हुआ था।
सुभद्रा कुमारी चौहान के पिता का नाम ठाकुर रामनाथ सिंह था। बचपन में ही काव्य में रूचि के कारण पंद्रह वर्ष की आयु में इनकी प्रथम काव्य रचना प्रकाश में आयी। राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रीय भूमिका निभाते हुए सुभद्रा कुमारी चौहान को कई बार जेल भी जाना पड़ा। 


सुभद्रा कुमारी चौहान की रचनाएँ

कविता 
1. मुकुल। 
2. त्रिधारा। 

कहानी 
1. बिखेरमोती। 
2. उन्मादिनी। 


जीवनी 
1. मिला तेज से तेज। 


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सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएँ 

गलबाँहें हों या हो कृपाण 
चल-चितवन हो या धनुष वाण 
हो रस-विलास  दलित त्राण 
अब यही समस्या है दुरंत 
वीरों का कैसा हो वसंत ?
               कह दे अतीत ! अब मौन त्याग 
               लंके!तुझमे क्यों लगी आग 
               ऐ कुरुक्षेत्र! अब जाग -जाग 
               बतला अपने अनुभव अनंत 
               वीरों का कैसा हो वसंत ?
हल्दी घाटी के शिलाखंड 
ऐ दुर्ग! सिंह-गढ़ के प्रचंड 
राणा- ताना का कर घमंड 
दो जगा आज स्मृतियाँ ज्वलंत 
वीरों का कैसा हो वसंत ?
               भूषण अथवा कवि चंद नहीं 
               बिजली भरदे वह छंद नहीं 
               है कलम बँधी स्वछन्द नहीं 
               फिर हमे बतावे कौन ? हंत 
               वीरों का कैसा हो वसंत ?

( मुकुल काव्य से ) 


सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं में वीर एवं वात्सल्य रस प्रधान है। गीत  लोकगीतों की गायन शैली में अपने भावों को स्वर देने मैं सुभद्रा जी सिद्ध है। अलंकार और प्रतीकों के मोह से मुक्त अनुभूतियों का सहज प्रकाशन ही सुभद्रा कुमारी जी काव्यगत विषेषता है।  सुभद्रा कुमारी चौहान की रचनाओं में समसामयिक देश-प्रेम , भारतीय इतिहास एवं संस्कृति की गहरी छाप पड़ी है। 
उन्होंने अपनी काव्य प्रतिभा से ऐतिहासिक , सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावनाओं को तत्कालीन राजनीतिक सन्दर्भों से जोड़कर नवजागरण का शंखनाद किया। सुभद्रा कुमारी चौहान जी की गद्य रचनाएँ छायावादी प्रवृति की निर्मल झांकी है जहां छायावाद का वही स्वप्नलोक , वही आदर्शवाद , वही उद्दात भाव आधारभूत रूप में विधमान है। देश में नव चेतना , त्याग बलिदान का अलख जगाने में आपके काव्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 


सहसा हुई पुकार मातृ 
मंदिर में मुझे बुलाया क्यों ?
जान-बूझकर सोयी थी फिर 
जननी मुझे जगाया क्यों ?
               इस बुंदेलों की झाँसी में 
               शस्त्रों बिना तार कैसा 
               देश प्रेम की मतवाली को 
               जननी ! पुरस्कार कैसा। 
हर पत्थर पर लिखा जहां 
बलिदान लक्ष्मी बाई का 
कौन मूल्य है वहाँ सुभद्रा 
की कविता की चतुराई का 

सुभद्रा कुमारी चौहान का सम्मान 

1.    28 अप्रैल 2006 को भारतीय तट रक्षक सेना ने सुभद्रा कुमारी चौहान को सम्मानित करते हुए। नए तट रक्षक जहाज का नाम सुभद्रा कुमारी चौहान रखा। 

2.   6 अगस्त 1976 को भारतीय डाक विभाग ने उनके नाम से 25 पैसे का डाक टिकट जारी किया। 

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वैवाहिक जीवन 

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म मध्यप्रदेश के खंडवा के निवासी लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ हुआ था। लक्ष्मण सिंह B A और L L B उच्च शिक्षा प्राप्त वकील थे। वे एक संपन्न परिवार से थे।  उस समय उनकी वकालत अच्छी चल रही थी और वे उस समय पढ़ भी रहे थे। वे रूढ़िवाद के विरोधी थे। 



13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर के आदेश पर ब्रिटिश बंदूकों ने जलियाँवाला बाग में निहत्थे लोगो को घेरकर गोलियों से भून दिया। इस नरसंहार में लगभग एक हजार लोग मारे गए।  इस निर्दयता ने भारतीय जनमानस में ब्रिटिश सरकार के खिलाप आक्रोश पैदा कर दिया। इस घटना ने सुभद्रा  चौहान के ह्रदय को अंदर तक झकझोर के रख दिया।  तभी संकल्प लिया की वे इस क्रांति यज्ञ में अपनी कलम से भाग लेंगी। 


" सुभद्रा जी की राष्ट्रीय कविताओं से प्रेरित होकर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' भी उनके जैसा बनना  चाहते थे।  उनकी आस्था पंत , निराला  , प्रसाद और महादेवी जैसे छायावदी कवियों में नहीं ,बल्कि सुभद्रा जी की ओजपूर्ण कविताओं में थी। 
                                                                            - राजेंद्र उपाध्याय 


सुभद्रा जी की मृत्यु 

साहित्य , परिवार और राजनितिक जीवन की त्रिधारा से गुजरते हुए अप्रैल 1948 ई. में अल्पायु में सुभद्रा कुमारी चौहान का निधन हो गया। 

               

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